होली 2022: Holi 2022 गीत, कविता, शायरी, निबंध, शुभकामनाये

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Holy 2022: भारत में हर साल होली को काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होली हिन्दुओं का एक मुख्य त्यौहार है और भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि होली को सिख, बौद्ध और जैन भी काफी ख़ुशी के साथ मनाते है। होली को सबसे ज्यादा भारत और नेपाल में मनाया जाता है। इसे “प्रेम का त्यौहार” (Festival Of Love), “भाईचारे का त्यौहार” (Festival Of Brotherhood) और सबसे ज्यादा “रंगों का त्यौहार” (Festival Of Colours) के नाम से जाना जाता है।

होली मुख्यतः दो दिन का त्यौहार होता है। पहले दिन को “होलिका दहन” (Holika Dahan) के नाम से जाना जाता है और दूसरा दिन “धुलेंडी” (Dhulandi) नाम से जाना जाता है।
होलिका दहन: इस दिन किसी एक जगह पर एक डंडा जमीन में गाड़ दिया जाता है डण्डे के आसपास कई सारी लकड़ियां रखकर लोग होलिका दहन करते है। जिसमें लोग खेतों में पकने वाली फसल जैसे गेंहूं के दानो आदि को भून कर खाते है।
धुलेंडी: इस दिन को रंगों के त्यौहार के रूप में जाना जाता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार वालों को रंग लगाते है, जिसे गुलाल कहते है। लोग सुबह से दोपहर तक होली खेलते है। गाने बजाये जाते है और लोग उन गानों पर नाचते है। कई लोग तो होली के दिन ठंडाई जैसे लस्सी, छाछ आदि पीते है।

2022 में होली कितने तारीख को है? 2022 Me Holi Kab Hai?

इस साल 2022 में होली 18 और 19 मार्च को है। 18 मार्च को होलिका दहन है और 19 मार्च को धुलेंडी है।

होली क्यों मनाई जाती है? Holi Kyu Manai Jati Hai?

होली को “बुराई पर अच्छाई की जीत” के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। होली मनाने के पीछे का एक बड़ा कारण यह है कि बहुत समय पहले, एक प्रह्लाद नाम का बालक था, जिसे लोग भक्त प्रह्लाद के नाम से भी जानते है। भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और वो हमेशा ही भगवान विष्णु की भक्ति में मग्न रहता था। पर उसके पिता हिरण्यकश्यप को यह बात मंजूर नहीं थी कि उसका पुत्र उसकी जगह उसके परम शत्रु विष्णु की पूजा करता है। हिरण्यकश्यप एक राक्षस था और उसका गुरु शुक्राचार्य था।
हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे को उसके गुरु शुक्राचार्य के पास भेज दिया ताकि उसके अंदर से भगवान विष्णु की भक्ति ख़त्म की जा सके पर इसका भी भक्त प्रह्लाद पर कोई असर नहीं हुआ। अंत में हिरण्यकश्यप सब कुछ प्रयास करने के बाद भी प्रह्लाद के मन से विष्णु की भक्ति नहीं निकाल पाया तो उसने उसकि बहन होलिका को बुलाया, जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गयी, पर वो खुद जल गई और भक्त प्रह्लाद का बाल भी बाक़ा नहीं हुआ। अंत में हिरण्यकश्यप स्वयं भक्त प्रह्लाद को मारने का प्रयास करता है, पर अपने परम भक्त को बचाने के लिए स्वयं प्रभु विष्णु नरसिंह अवतार में आते है और हिरण्यकश्यप को मारकर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करते है। 
तो थी होली के पीछे की कहानी, अब आपको समझ आ गया होगा कि होली क्यों मनाई जाती है?
 
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होली के दिन लोग कई तरह के गीत, कविता और शायरियाँ गाते है और अपने दोस्तों और परिवार के लोगों का मनोरंजन करते है। बहुत से स्कूलों में होली आने से पहले ही कई तरह के होली गीत गाये जाने लग जाते है। कई छोटे-बड़े बच्चें होली के मौके पर गीत, कवितायेँ गाते है और होली के आगमन को लेकर हर्षोत्साहित रहते है। ऐसे मौकों पर गाये जाने वाले गीतों और कविताओं को आप नीचे पढ़ सकते है।

1. होली गीत, Holi Git, Holi Song

*पहला गीत* “रंग-गुलाल भरी पिचकारी”
 
पहला गीत होली, पिचकारी और होली के रंगों पर है, जिसमें एक लड़की बता रही है कि किस प्रकार वह होली के त्यौहार का आनंद ले रही है। वो अपनी सहेलियों के साथ होली खेल रही है और जैसे ही लड़कों की टोली आती है, वह इधर-उधर भागने लगती है। पर वो उन्हें गुलाल लगा देते है और पिचकारी से उन्हें भिगों देते है।
फागुन लाग अंग फड़कत है, 
खेलन आयो होली रे। 
रंग-गुलाल भरी पिचकारी, 
भिगा दियो मेरी चोली रे।
 
पकड़ कलाई मेरी मरोड़ी, 
रगड़ दियो दोनों गाल। 
रंग-बिरंगी हो गई मैं तो, 
कियो बुरा ये हाल। 
 
सखी-सहेली मिल करके अब, 
करती जोरा-जोरी रे। 
रंग-गुलाल भरी पिचकारी, 
भिगा दियो मेरी चोली रे।
 
उधर लड़कों की टोली आई, 
हो गई उनसे भेंट। 
इधर-उधर सखिया सब भागी, 
एक ने लिया चहेट।
 
पाय अकेले कहन लगा कि, 
रगडूंगा आज हे गोरी रे।
रंग-गुलाल भरी पिचकारी, 
भिगा दियो मेरी चोली रे।
*दूसरी गीत* आई होली, आई होली!”
इस गीत के माध्यम से यह बताया गया है कि जैसे ही फागुन का महीना आता है और मौसम जब सुहाना हो जाता है, तो होली के दिन राधा और गोपियों को इस बात का डर लगा रहता है कि कहीं कान्हा आकर उन्हें न रंग दे। गोपियाँ जहाँ भी जाती है, नटखट कान्हा उन्हें गुला से रंग देता है। पर सभी गोपियाँ और राधा मिलके कान्हा को घेर लेती है और फिर सब कान्हा के साथ होली खेलती है।
आई होली, आई होली!
 
रंगों की लेके, आया मौसम सुहाना
राधा को रंगने, लेके दिल मस्ताना
प्यार का अपने, ये लेके खजाना
दिल में सजाए, आया कृष्ण दीवाना
 
बड़ा ही सुंदर, फागुन महीना
कर दे मुश्किल, गोपियों का जीना
हर घड़ी ,हर पहर ताके ये बैठे
रंगने गोपियों को, अबकी महीना
 
न छोडेंगे चुनरी, न चोली सबकी
भर पिचकारी, भिगोयेंगे है अबकी
राधा भी अबकी है मन को बनाई
आओ खेले होली, कृष्ण कन्हाई
 
सखियों मिल सब करे आंख मिचौली
सताए कान्हा को सब बन हमजोली
मौसम है अब देखो मस्त्त सुहाना
गाती जाए अंजली भी प्रीत का गाना
 
आई होली, आई होली!

 –अंजली श्रीवास्तव

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कवितायें सुनना और सुनाना दोनों ही अच्छा लगता है और होली के त्यौहार पर आप इन कविताओं से अपने बच्चों को बता सकते है और अपने बच्चों को भारतीय त्योहारों के प्रति ज्यादा आकर्षित कर सकते है।

2. होली पर कविता, Holi Kavita, Holi Poem

*पहली कविता* “रंग रंगीली आई होली”

मुझे यह कविता सर्वादिक अच्छी लगी है, क्योंकि इसमें होली के साथ-साथ होली के आदर्शों और नैतिक कर्तव्यों को भी बताया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे हमें छोटे-बड़े और ऊँच-नीच को भुला कर एक दूसरे को प्यार की होली लगनी चाहिए। होली हमें सिखाती है कि जब सभी पर रंग लगा होता है तो सब एक ही हो जाता है, न कोई बड़ा होता है और न ही कोई छोटा।

रंग रंगीली आई होली,

खुशियों को संग लायी होली। 

अपने रंग में रंगने को,

अपनों को संग लायी होली। 

बुराईयों को मिटाने को,

अच्छाई का दीप जलाये होली। 

रूठे हुए को मनाने को,

प्यार की भाषा सिखाये होली। 

भूखे हुए को खिलाने को,

पकवानों की थैली लायी होली। 

बिछड़े हुए को मिलाने को,

रंगों की शाम लायी होली। 

सभी के जीवन को खुशहाल करने को,

यादों की पोटरी लायी होली। 

*दूसरी कविता* रंगों का त्योहार है

इस कविता में होली से सम्बंधित सब कुछ बड़े ही सरल शब्दों में लिख दिया गया है।

रंगों का त्योहार है,

खुशियों की सौगात है। 

अपनों का साथ है,

दोस्तों का प्यार है। 

बच्चों की शरारत है,

बुजुर्गों का आशीर्वाद है। 

पकवानों का स्वाद है,

रंगों की बरसात है। 

पुरुषों की भांग है,

महिलाओं के गीत है। 

अच्छाई की कामना है,

मिलन की अभिलाषा है। 

फूलोँ का मेला है,

रंगों की भीड़ है। 

साथ मिलकर मनाओ,

यह रंगों का त्योहार है।

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आप होली पर इन बेहतरीन शायरियों को अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को सुना सकते है। लोगों को शायरियाँ सुनना और सुनाना अच्छा लगता है और होली तो साल-भर में एक बार आता है तो यहीं सही समय है इन शायरियों का लुत्फ़ उठाने का।

3. होली शायरी, Holi Shayari

a. Holi Shayari Hindi

खा के गुजिया पीके भंग 

लगा के थोड़ा थोड़ा सा रंग 

बजा के ढोलक और मृदंग 

खेले होली हम तेरे संग

b. Shayari on Holi

दिलो के मिलने का मौसम है 

दूरियां मिटाने का मौसम है 

होली का त्यौहार ही ऐसा है 

रंगो में डूब जाने का मौसम है

c. Holi Shayari in hindi

हवाओ के साथ अरमान भेजा है, 

नेटवर्क के ज़रिये पैगाम भेजा है, 

वो हम हैं जिसने सबसे पहले, 

होली का राम-राम भेजा।

d. Holi ki Shayari

पूनम का चाँद

रंगों की डोली

चाँद से उसकी चांदनी बोली

खुशियों से भर दे सबकी झोली

मुबारक हो आपको ये होली

e. Holi Shayri

पिचकारी की धार,

गुलाल की बौछार,

अपनों का प्यार,

यही है यारों होली का त्यौहार.

हैप्पी होली…

f. Holi Shayri in Hindi

होली के इस पर्व पर

लगे रंग हर गाल

राष्ट्र रंग सब में रमे

हर घर हो खुशहाल

3. होली की शुभकामनाये | Holi Ki Shubhkamnaye | Happy Holi Wishes |

आप अपने दोस्तों और परिवार वालों को ये होली की शुभकामनाये भेज सकते है।

आपको और आपके परिवार को रंगों के त्यौहार होली की हार्दिक शुभकामनाये और आज का दिन है, पूड़ी-पकौड़ी और मिठाइयाँ बनाकर होली मनाने का। हैप्पी होली!

होली के पावन अवसर पर आप सभी अपने परिवार के साथ होली की अनंत खुशियां हासिल करे और इन यादों को जिंदगी भर तक अपने दिल में संजोये। हैप्पी होली!

जिस तरह होली को भाईचारे का त्यौहार कहा जाता है, उसी तरह आप भी ऐसी होली मनाये कि अपने सारे झगड़ों और नराजगियों को ख़त्म कर दे। हैप्पी होली!

 इस होली पर आपको और आपके परिवार को मेरी तरफ से ढेर सारी बधाइयाँ और मेरी दुआ है कि आप अपनी जिंदगी में खूब तरक्की करे। हैप्पी होली! 

आप सभी के जीवन में से नीरस रंगों को खात्मा हो और होली के रंगों के जैसे आपके जीवन में अनगिनत रंग हो और आपका जीवन खुशमय हो। हैप्पी होली! 

होली का त्यौहार आपकी जीवन में हिमालय पर्वत जितनी बड़ी खुशियां लाये और आपके जीवन में ख़ुशी की लहार दौड़ जाये। हैप्पी होली!

4. होली पर निबंध | Essay On Holi In Hindi Of 400 Words | Holi Par Nibandh |

essay on holi in hindi
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होली का पर्व देश दुनिआ में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है और भारत, नेपाल में सबसे होली मनाई जाती है। हर साल होली फागुन के महीने में आती है और यह समय हलकी गर्मी का होता है। लोगों और विशेषकर छोटे बच्चों में होली के प्रति काफी जूनून होता है। होली विशेषतः दो दिन का त्यौहार होता है। पहले दिन को “होलिका दहन” कहते है। इस दिन लोग एक जगह पर कई सारी लकड़ियां इकठ्ठा करके होली जलाते है और नै पाकी फसलों जैसे गेंहूं आदि को इस होलिका दहन की आग में सेंखते है। लोगों का मानना है कि इस आग में फसल आदि सेंखने से फसल की पैदावार अच्छी होती है। दूसरे दिन को धुलेण्डी के नाम से जानते है। यह होली का मुख्य दिन होता है ,इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते है और ठंडाई जैसे लस्सी, छाछ आदि पीते है। लोग म्यूजिक और गाने बजाकर उन पर खूब नाचते है। बच्चे सुबह से ही खेलना शुरू कर देते है और दोपहर तक होली खेलते है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर एक-दूसरे को गुलाल लगाते है।

इस त्योहार को मनाने के पीछे एक कारण माना जाता है कि आज से कई सालों पहले एक प्रह्लाद नाम का बालक था। जिसकी भगवान विष्णु में अटूट श्रद्धा थी। चूँकि उसका पिता एक राक्षस था और उसे एक वरदान प्राप्त था कि उसे न तो कोई स्त्री मार सकती है और न ही कोई पुरुष। न ही कोई पशु मार सकता था और न ही कोई पक्षी। वो न दिन में मर सकता था और न ही रात में। उसे न कोई अस्त्र मार सकता था और न ही कोई को शस्त्र। इस वरदान के कारन उसमें काफी घमंड आ गया था और वो भगवान विष्णु को अपना परम शत्रु मानता था तो ऐसे में अगर उसका खुद का बेटा ही उसे न पूजकर उसके शत्रु को पूजे तो उसको इस बात से काफी नाराजगी थी।

वो चाहता था कि प्रह्लाद उसकी पूजा करे, पर कोई भी प्रयत्न काम न करता देख उसने अपनी बहन होलिका से बोला कि तू इसे अपनी गोदी में बैठाकर आग में जला दे। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। पर भक्त प्रह्लाद तो बच गया लेकिन होलिका उसी आग में जलकर मर गई। और अंत में जब हिरण्यकश्यप ने खुद भक्त प्रह्लाद को मारने की कोशिश की तो स्वयं भगवान विष्णु नरसिंह अवतार लेकर प्रह्लाद को बचाने आये और हिरण्यकश्यप का पेट चीरकर इस धरती से एक पापी को ख़त्म किया। इसलिए होली के त्यौहर को अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक माना जाता है।

गोकुल की पावन होली मेरे प्रभु श्री कृष्ण वाली! मेरे विचार. 

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मेरे प्रभु श्री कृष्ण के संग मेरी होली, उनकी बाँसुरी की धुन मेरे मन मस्तिष्क को परम सुख प्रदान करती है।

मैं तो उस पावन समय की होली को याद करता हूँ, जब मेरे प्रभु Shree Krishna गोकुल में होली खेला करते थे। क्या रमणीय दृश्य होता होगा वो! श्री कृष्णा की बाँसुरी की धुन से पूरा गोकुल पवित्र हो जाता था। लोग अपने दुःख-दर्द भूल कर कृष्णा की बँशी के मंत्रमुग्द हो जाते थे। इंसान ही नहीं बल्कि पशु भी उस बँशी की धुन को सुनकर मतवाले हो जाते थे। होली के समय गोकुल के ग्वाले और श्री कृष्णा गोपियों के साथ होली खेला करते थे। आज की तरह पापी सोच न रखकर, वे सभी एक पवित्र प्रेम के साथ होली खेलते थे। मेरा मन भी करता है कि मैं इस परम आनंद की प्राप्ति कर सकू, जब मेरे प्रभु अपनी बासुरी की धुन से मेरे घर आँगन को पवित्र कर सके।
 
अगर आप अपने दोस्तों को होली की शुभकामनाएं संदेश देना चाहते है तो आप हमारे “Radha Krishna Happy Holi Images” Post पर जा सकते है।
 
मुझे आशा है कि आपको होली Holi 2022 पर यह लेख पसंद आया होगा। निश्चित रूप से आपके ये होली गीत, होली कविता, होली शायरी, होली निबंध, होली की शुभकामनाये, होली कब और क्यों मनाई जाती है, होली रंगों का त्यौहार, इत्यादि।, अच्छे लगे होंगे।

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